Latest Property News on 'Gurgaon'


HUDA policy for extension in construction time

Add comment   |  May 10, 2012

Chandigarh: The Haryana Urban Development Authority (HUDA) today modified and finalized the policy for grant of extension in time for construction on Institutional sites and grant of extension fee.
As per the existing policy for sites for social, charitable trusts, religious institutions, philanthropic institutions and trusts, the constructions were required to be completed with a period of two years from the date of the offer of possession. Further, an extension of three years was permissible for completing construction on such institutional sites on payment of extension fee. Now the total period of completing construction would be seven years from the date of possession.

For social and religious institutions existing in high potential zone for first year of extension the rate of extension fee per square meter have been increased from Rs five to Rs 10, for second year from Rs eight to Rs 15, for third year from Rs 10 to Rs 20, for fourth year and fifth year it has been increased to Rs 25 and Rs 30 respectively. For medium potential zone for the first year of extension the rate has been increased from Rs three to Rs five per square meter, for second year from Rs five to 10, for third year from Rs eight to Rs 15 and for fourth and fifth year it has been increased to Rs 20 and Rs 25 per square meter respectively. For those existing in low potential zone, for the first, second, third, fourth and fifth year of extension the rates have been increased to Rs four, Rs six, Rs 10, Rs 15 and Rs 20 per square meter respectively.

In case the allottee of institutional plot allotted to department of government or its organizations fails to complete construction within ten years from the date of offer of possession then the case of further extension in the time limit up to two years.



Competition Commission of India pulls up DLF for allotment cancellation

Add comment   |  May 10, 2012

GURGAON: The Competition Commission of India (CCI) has pulled up real estate major DLF Ltd in a recent order for cancelling the allotment of an apartment of a member of DLF’s Park Place RWA, stating that it was in “direct contravention” of its stay order of September 2010.

The order was passed by the commission to prevent the opposite party from abusing its dominant position to the detriment of allottees during pendency of the proceedings. The CCI also severely admonished the builder for discriminatory behaviour towards members of the owners’ association and other allottees/owners.

The cancellation letter for one Vipin Mahajan was issued on January 28 last year when the interim order was in force. According to Mahajan, despite the directions being in force to date, the opposite party issued a letter in January last year, cancelling the booking of his apartment and forfeited a sum of Rs 23,06,778 out of the total amount of Rs 44,89,503.

While the CCI accepted this restoration of status quo and therefore felt that no further direction needs to be passed as far as restitution of Mahajan’s apartment was concerned which had been a great relief for the allottee concerned, the CCI as prescribed by the Competition Act 2002 “is obliged to impose penalty because of the deliberate non-compliance”. This, the order stated, was a violation of Section 42 of the Act.

Also, Section 48 of the Act makes it a liability of every person for penalty, who at the time of contravention was in charge of or was responsible to the company for conducting its business. DLF will now have to disclose the name of the errant persons who were responsible for the misconduct and also give a showcause notice as to why the penalty should not be imposed. The case on the same is up for hearing on May 17.

Meanwhile, a spokesperson of DLF Ltd clarified that the company had “restored the ownership of the apartment which was %cancelled due to non-payment of dues by the %allottee”.



ऐडमिनिस्ट्रेटर के आदेश पर भी नहीं बदले हालात

Add comment   |  May 9, 2012

सेक्टर में पार्कों व ग्रीन बेल्ट की हालत बेकार है। पार्कों में हरियाली नहीं है और दीवार टूटी होने की वजह से यहां आवारा पशु घुमते रहते हैं। सेक्टर की सड़कों का भी बहुत बुरा हाल है। मुख्य सड़क हो या अंदर की रोड किसी पर भी चलना आसान नहीं है। यहां चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। इसके अलावा पीने के पानी की भी किल्लत है। कई बार जूनियर इंजीनियर, इग्जेक्युटिव इंजीनियर व एस्टेट ऑफिसर से इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के प्रेजिडेंट राधेश्याम ने बताया कि ऐडमिनिस्ट्रेटर ने जो आदेश जारी किए थे, उन्हें अब तक इंजीनियर्स ने पूरा नहीं किया है। इस वजह से सेक्टर के हालात वैसे ही हैं। इंजीनियर्स की इस लापरवाही को ऐडमिनिस्ट्रेटर के सामने रखा जाएगा और सेक्टर में विकास कार्य करवाने का आग्रह किया जाएगा।

जनवरी में किया था ऐडमिनिस्ट्रेटर ने दौरा

इस पॉकेट का दौरा 6 जनवरी, 2012 को ऐडमिनिस्ट्रेटर ने किया था। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए थे कि सेक्टर की समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द करवाया जाए।

इंजीनियर्स से उम्मीद नहीं

ऐडमिनिस्ट्रेटर के दौरे के बाद लगा था कि शायद अब सेक्टर का विकास हो जाएगा। अब तक ऐसा नहीं हुआ है। अगर इंजीनियर्स ने ऐडमिनिस्ट्रेटर के आदेश पर कुछ नहीं किया तो आम आदमी की शिकायत पर क्या करेंगे?

- बी. एस. कादयान, रेजिडेंट

शिकायतों का नहीं फायदा

सेक्टर में पार्कों व ग्रीन बेल्ट की बेकार है। कई बार हॉर्टिकल्चर विंग के जूनियर इंजीनियर , सब डिवीजनल इंजीनियर व इग्जेक्युटिव इंजीनियर से मुलाकात की गई है , लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

- नितिन यादव , रेजिडेंट

दौरे के बाद नहीं हुई सफाई

यहां बिल्कुल भी सफाई नहीं है। जगह – जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। ऐडमिनिस्ट्रेटर ने जिस दिन दौरा किया था , उस दिन सफाई कर्मचारियों ने सफाई कर दी थी और उनके दौरे के बाद सभी कर्मी गायब हो गए।

- राम कुमार , रेजिडेंट

सड़कें बदहाल

सड़कों की हालत बहुत खराब है। सड़कों पर बहुत गंदगी फैली है , जिस वजह से इनसे गुजरना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा सेक्टर में बीमारियां भी फैल रही है।

- बलबीर सिंह , रेजिड ेंट



आईएमटी रोजकामेव बनेगा कमर्शल हब

Add comment   |  May 9, 2012

इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप ( आईएमटी ) मानेसर में जैसी जगह की तलाश पूरी हो गई है। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन सिटी के आउटर साइड सोहना रोड पर आईएमटी रोजकामेव डिवेलप करेगा। कॉरपोरेशन ने किसानों से 1501 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। नए आईएमटी प्लेस पर सड़क , सीवर , बिजली , पानी , डे्रनेज , आधारभूत संरचना की बहाली प्लानिंग शुरू कर दी गई है।

सिटी में महरौली रोड स्थित आईडीसी में तमाम यूनिट हैं। इसको सिटी की सबसे ज्यादा पुरानी यूनिट एरिया माना जाता है। ओल्ड दिल्ली रोड स्थित उद्योग विहार में 80 के दशक में यूनिट की शुरुआत हुई। यहां 250 गज से लेकर 4 हजार गज के प्लॉट हैं। यहां पर डेढ़ हजार यूनिट हैं। ओल्ड दिल्ली रोड पर ही मारुति कंपनी के पास की सेक्टर 18 में इलेक्ट्रिॉनिक सिटी है। यहां पर 400 से ज्यादा आईटी कंपनियां हैं। नैशनल हाइवे – 8 स्थित आईएमटी मानेसर में डेढ़ हजार यूनिट चल रही हैं। अभी यहां डेढ़ हजार यूनिट और लगनी है। इसके लिए कॉरपोरेशन पहले की प्लॉट दे चुका है। कॉरपोरेशन ने मानेसर में औद्योगिक विस्तार के लिए 5000 एकड़ से ज्यादा जमीन अधिग्रहण का प्लान कई साल पहले से बना रखा है। एनएच – 8 हीरो होंडा चौक के नजदीक सेक्टर सेक्टर 34-35 में 290 एकड़ में न्यू इंडस्ट्रियल एस्टेट डिवेलपमेंट का काम कॉरपोरेशन कर रहा है।

हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव अरोड़ा ने बताया कि गुड़गांव सिटी में नए आईएमटी रोजकामेव के लिए जमीन ली जा चुकी है। इसको बेहतरीन और आधुनिक जरूरतों के हिसाब से डिवेलप करने का होमवर्क और प्लानिंग कॉरपोरेशन ने शुरू कर दिया है।



Four companies file bids for 16-lane Golf Course road

Add comment   |  May 8, 2012

GURGAON: Four companies have filed bids for HUDA-DLF sectoral road connecting Gurgaon Expressway near DLF Cyber City to Golf Course Road. The state government had given its approval for the 8.3-kilometre road project in 2008.The bids are being scrutinized by a leading project management company, Parsons Brinckerhoff, and the project is likely to be awarded in a month, said DLF officials. With the deadline set for September 2014, time began ticking for the project in September 2011 when the Haryana Urban Development Authority (Huda) and realty major DLF signed an agreement on a 50-50 profit-sharing basis.

A revised concept study of the project was submitted by global design and planning firm AECOM last year. A senior DLF executive said the agreement was signed after ironing out technical and commercial issues between Huda and DLF.With six underpasses at various points of the sectoral road and a flyover at Sikanderpur junction, the project, once completed, will ease traffic jams in Cyber City that houses companies like Pepsi, Dell, Yahoo, Google, Microsoft, Coca-Cola, Hewlett Packard, Nokia, American Express, etc. The new road will reduce the travel time to three minutes from the present 30 minutes.DLF plans to spend Rs 400-600 crore on the project that will include eight underpasses and a long flyover enabling commuters to reach Golf Course Road from the Gurgaon toll plaza within seven minutes. This stretch usually takes 30 minutes.



फिफ्थ ईयर प्लान बन गया एनपीआर!

Add comment   |  May 7, 2012

एनबीटी न्यूज ॥ गुड़गांव

दिल्ली के द्वारका से गुड़गांव के खेड़कीदौला को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड ( एनपीआर ) का काम अटक गया है। इसके बनने के बाद द्वारका से जयपुर जाने वाली गाडि़यों को शहर के अंदर नहीं आना पड़ेगा। इस 90 मीटर चौड़ी रोड का सपना दिखाकर कई बिल्डर्स ने 100 से ज्यादा हाउसिंग स्कीम लॉन्च कर दीं। इसके किनारे 5 एसईजेड प्रस्तावित हैं। लेकिन रोड बनाने का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। 18 किमी की रोड बननी है जिसमें से अभी तक 14 किमी का ही टेंडर जारी किया जा सका है। इस पर भी 30 से 35 फीसदी ही काम हुआ है। पहले इसे 31 मार्च , 2012 तक टारगेट पूरा करना था , अब समयसीमा अक्टूबर , 2012 कर दी गई है। वहीं , जानकारों का कहना है कि वास्तविक हालात को देखने से लगता है कि कम से कम इसे पूरा होने में 3 साल लग जाएंगे। अभी तक फ्लाईओवर का डिजाइन ही तैयार नहीं हो सका है। हाइटेंशन लाइन को भी शिफ्ट करने की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। 4 किमी के हिस्से पर हाई कोर्ट का स्टे है।

एनपीआर का ठेका 1 अप्रैल , 2011 को 132 करोड़ में छोड़ा गया था। इसकी कुल लंबाई 18 किलोमीटर है। इसमें 4 किलोमीटर एरिया पर अदालत का स्टे है। पिछले साल हूडा ने 14 किलोमीटर सड़क निर्माण का टेंडर करीब 44 करोड़ रुपये में एक कंपनी को सौंपा था। इसकी डेडलाइन 31 मार्च निर्धारित की गई थी। अब तक इसमें से करीब 30 से 35 प्रतिशत काम ही कंप्लीट हो सका है। यह रोड दिल्ली के द्वारका से शुरू होगा जो एनएच 8 से खेड़कीदौला गांव में जाकर मिलेगा। इसके निर्माण के बाद गुड़गांव शहर के अंदरूनी हिस्से में ट्रैफिक कम हो जाएगा। द्वारका से मानेसर की तरफ जाने वाले वाहन इस रोड से सीधा निकल जाएंगे। इस रोड पर कई सेक्टर बने हैं। इनमें 100 से ज्यादा हाउसिंग स्कीम लॉन्च की गई है। इसके अलावा 5 एसईजेड भी हैं। यह एक अति महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इसे द्वारका एक्सप्रेस के नाम से भी जाना जाता है।

क्या हैं अड़चनें

इस एरिया में 9 फैक्ट्री आ रही हैं , जो बजघेड़ा , बसई व खेड़कीदौला गांव में हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने इस जमीन के बदले में फैक्ट्रियों को अलटरनेट प्लॉट देने के आदेश दिए हैं। इस मामले में अभी तक हूडा ने कोई कारगर कार्रवाई नहीं की है। इस वजह से अभी तक फैक्ट्री मालिकों को जमीन नहीं मिल सकी है। जमीन मिलने के 9 महीने के अंदर उस पर फैक्ट्री का निर्माण करना है। एक्सपर्ट की राय है कि इसमें एक साल तो लगेगा ही।

एनपीआर के रास्ते में पटौदी रोड , फर्रुखनगर रोड , बजघेड़ा रोड व दौलताबाद रोड पर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना है। अब तक इसका डिजाइन ही तैयार नहीं हो सका है। डिजाइन तैयार होने के बाद उसे मंजूर करवाया जाएगा फिर एस्टिमेट बनेगा। इसके बाद एस्टिमेट मंजूर होगा। टेंडर आमंत्रित करने और उसे अलॉट करने की प्रक्रिया में भी कम से कम 2 साल लगने की बात कही जा रही है।

एनपीआर के रास्ते में एचवीपीएन के 66 केवीए के 6 टावर भी आ रहे हैं। टावर और लाइन को शिफ्ट करने में भी कम से कम एक से डेढ़ साल तक का समय लगेगा।

रोड का 500 मीटर का टुकड़ा जमीन नहीं मिलने के कारण अटका है। यह लैंड एक निजी कंपनी की है। इसे दिलवाने का आग्रह एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों से किया गया है।

4 किलोमीटर रास्ता का अभी टेंडर अलॉट नहीं किया गया है। यह जमीन अदालती पचड़े में फंसी है। न्यू पालम विहार में करीब 250 मकान व खेड़कीदौला के करीब 150 मकान एनपीआर के रास्ते में आ रहे हैं। पिछले साल पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने हूडा व याचिकाकर्ताओं को एकसाथ बैठकर मामला सुलझाने के आदेश दिए थे। अभी तक यह विवाद सुलझ नहीं सका है। लोग प्लॉट के बदले में प्लॉट व कंस्ट्रक्शन कॉस्ट का मुआवजा चाहते हैं। हूडा पॉलिसी के अनुसार प्लॉट दे सकता है। इसके चलते यह मामला बीच में ही अटका हुआ है।

कोट

एनपीआर की राह क्लियर करने के लिए 2 दिन पहले ही एक बैठक ली गई थी। इसमें हूडा के अलावा एचवीपीएन , भूमि अधिग्रहण ऑफिस , टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट व एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। सभी को निर्देश दिए गए हैं कि एनपीआर का निर्माण जल्द से जल्द करवाने का प्रयास करें। अड़चनों को देखने से लगता है कि अभी इसके निर्माण में समय लगेगा।

- डॉ . प्रवीण कुमार , ऐडमिनिस्ट्रेटर हूडा



FIR against developer for selling plots without licence

Add comment   |  May 6, 2012

GURGAON: Acting against “erring” developers, the department of Town and Country Planning has lodged an FIR against a builder in Gurgaon for selling plots without obtaining a licence from it. District Town Planner (DTP), Gurgaon, Anil Dabas said in a release that the builder company was booking plots in Sector 78 and 79 in Gurgaon under its project named ‘Cambrian Island’.

This is a prelaunch type of project and the company used to lure investors through advertisements on the internet though it still has no licence for selling plots, so thereby making the entire project illegal, he said. He said the FIR has been registered in Kherki Dhaula police station and the police were investigating the matter. Dabas appealed to prospective buyers to verify the legal status of any construction company from the local office of DTP before booking a a plot or a flat. No one can book or sell plots without obtaining a valid licence from the department of Town and Country Planning, Haryana, and if anyone does so it is illegal, he said. Getting a licence is a mandatory condition before launch or prelaunch of a construction project, he said.



Four companies file bids for 16-lane Golf Course road

Add comment   |  May 6, 2012

GURGAON: Four companies have filed bids for HUDA-DLF sectoral road connecting Gurgaon Expressway near DLF Cyber City to Golf Course Road. The state government had given its approval for the 8.3-kilometre road project in 2008.The bids are being scrutinized by a leading project management company, Parsons Brinckerhoff, and the project is likely to be awarded in a month, said DLF officials. With the deadline set for September 2014, time began ticking for the project in September 2011 when the Haryana Urban Development Authority (Huda) and realty major DLF signed an agreement on a 50-50 profit-sharing basis.

A revised concept study of the project was submitted by global design and planning firm AECOM last year. A senior DLF executive said the agreement was signed after ironing out technical and commercial issues between Huda and DLF.With six underpasses at various points of the sectoral road and a flyover at Sikanderpur junction, the project, once completed, will ease traffic jams in Cyber City that houses companies like Pepsi, Dell, Yahoo, Google, Microsoft, Coca-Cola, Hewlett Packard, Nokia, American Express, etc. The new road will reduce the travel time to three minutes from the present 30 minutes.DLF plans to spend Rs 400-600 crore on the project that will include eight underpasses and a long flyover enabling commuters to reach Golf Course Road from the Gurgaon toll plaza within seven minutes. This stretch usually takes 30 minutes.



नीलामी के पैसे से होगा डिवेलपमेंट

Add comment   |  May 5, 2012

एनबीटी न्यूज ॥ गुड़गांव

मेफिल्ड गार्डन कॉलोनी की करीब 70 एकड़ जमीन नीलाम कर वहां रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी। गुरुवार सुबह हूडा ऐडमिनिस्ट्रेटर डॉ . प्रवीण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह फैसला किया गया। ऐडमिनिस्ट्रेटर ने इसका प्रपोजल तैयार कर जल्द से जल्द आला अफसरों को भेजने की हिदायत दी।

बैठक में बिजली निगम के इग्जेक्युटिव इंजीनियर ने कुमार को मेफिल्ड गार्डन की बिजली व्यवस्था से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि कॉलोनी में इंटरनल व्यवस्था पर करीब 12 करोड़ व 66 केवीए सबस्टेशन के निर्माण पर करीब 35 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। इस पर कुमार ने प्रपोजल तैयार कर उन्हें भिजवाने के निर्देश दिए। पानी की सप्लाई को लेकर बात की गई। इसमें कहा गया कि मौजूदा समय में यहां ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई की जा रही है। इग्जेक्युटिव इंजीनियर को कॉलोनी में नहरी पानी पहुंचाने के लिए वॉटर सप्लाई का एस्टिमेट तैयार करने का आदेश दिया गया। इसे एक महीने के अंदर तैयार किया जाए।

ऐडमिनिस्ट्रेटर ने सीनियर टाउन प्लैनर से कॉलोनी की पूरी डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें भवनों की संख्या भी शामिल है। बैठक में मकान , फ्लैट व प्लॉट की किस्तों पर भी चर्चा हुई। कुमार ने कहा कि इस मामले को टीसीपी डायरेक्टर के समक्ष रखा जाएगा। उनसे आग्रह किया जाएगा कि एक अकाउंट बनाया जाए , जिसमें किस्त जमा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोग सोचकर बैठे हैं कि अब किस्त का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है। यह किस्त टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट वसूल करेगा।

इस बैठक में कम्यूनिटी बिल्डिंग्स जैसे क्लब , कम्यूनिटी सेंटर व स्कूल को लेकर भी चर्चा की गई। इसमें सीनियर टाउन प्लैनर से कहा गया कि इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत तैयार किया जाए। इस प्रपोजल को डायरेक्टर को भेजा जाए। बैठक करीब 3 घंटे तक चली। इसमें सीनियर टाउन प्लैनर आर . के . सिंह , सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर आदर्श कुमार गुप्ता , इग्जेक्युटिव इंजीनियर हरिदत्त शर्मा , वी . के . श्योकंद , डीटीपी ( ई ) अनिल डबास , डीएचबीवीएन के इग्जेक्युटिव इंजीनियर वी . के . अग्रवाल , इग्जेक्युटिव इंजीनियर इलैक्ट्रिकल अरुण धनखड़ , मेफिल्ड गार्डन आरडब्ल्यूए जाइंट फेडरेशन की प्रेजिडेंट व पार्षद निशा सिंह , जनरल सेक्रेटरी संजय सिंह , शीतल रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के प्रेजिडेंट धर्मवीर सिंह आदि मौजूद थे।

मेंटिनेंस का सौंपा जाए जिम्मा

आरडब्ल्यूए जॉइंट फेडरेशन की प्रेजिडेंट निशा सिंह ने कहा कि वे मेंटिनेंस जैसे साफ सफाई , पानी व सीवरेज की समस्या , सिक्युरिटी आदि का जिम्मा लेने को तैयार हैं। इसके लिए फेडरेशन कुछ चार्ज करेगी , लेकिन कुछ लोग चार्ज देने को तैयार नहीं होते। उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें लिखित रूप से इसकी परमीशन दी जाए। इस पर ऐडमिनिस्ट्रेटर ने मंजूरी दे दी। जल्द ही फेडरेशन को लिखित रूप से मेंटिनेंस शुल्क वसूलने की अनुमति दी जाएगी।

बॉक्स के लिए प्रस्तावित

बिल्डरों के लाइसेंस हुए थे रद्द

मेफिल्ड गार्डन कॉलोनी को विकसित करने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने 5 बिल्डरों को 26 लाइसेंस जारी किए थे। यह कॉलोनी करीब 332 एकड़ में सेक्टर -47, 50, 51, 52, 57 की जमीन पर बसी है। ईडीसी , आईडीसी व रिन्युअल फीस की अदायगी नहीं करने पर 4 फरवरी को इनका लाइसेंस कैंसल कर दिया गया था। बिल्डरों ने जिन लोगांे को प्रोपर्टी बेची है , उनसे किए वायदों को भी पूरा नहीं किया था। इससे निवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा था। इसको लेकर टीसीपी डायरेक्टर टी . सी . गुप्ता ने ऐडमिनिस्ट्रेटर की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन कर कॉलोनी में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने के आदेश दिए थे।



26.77 करोड़ से रोड के निर्माण में रोड़ा

Add comment   |  May 4, 2012

हूडा और पीडब्ल्यूडी बी एंड आर के एस्टिमेट में 26.77 करोड़ रुपये का अंतर आने से गुड़गांव – सोहना रोड का निर्माण लटक गया। हूडा ने रोड के निर्माण पर 48.53 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया था। वहीं , पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने 75.30 करोड़ रुपये का एस्टिमेट बनाया है। एस्टिमेट में उलझने से सड़क का निर्माण लटक गया है। इससे वाहन चालकों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

हूडा ने गुड़गांव – सोहना रोड पर राजीव चौक से बादशाहपुर ड्रेन तक ( करीब 6 किलोमीटर ) का एस्टिमेट 48.30 करोड़ रुपये का तैयार किया था। इसे 3 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित वर्क कमिटी में मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद हूडा ने टेंडर आमंत्रित किया। इसी बीच सरकार ने इस रोड का निर्माण पीडब्ल्यूडी बी एंड आर को हैंडओवर करने के आदेश दिया। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। आदेश में कहा गया कि रोड निर्माण का खर्च हूडा देगा। पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने 75.30 करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार कर हूडा को भेज दिया।

हूडा ने इस एस्टिमेट में कई खामियां निकाली हैं। इन खामियों से चीफ इंजीनियर , हूडा को अवगत करवा दिया गया है। इसमें कहा गया है कि हूडा ने सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ( सीआरआरआई ) से इसका ट्रैफिक सर्वे करवाया था। वहीं , पीडब्ल्यूडी बी एंड आर ने एक लोकल एजेंसी से इसकी टेस्टिंग करवाई है , जो सीआरआरआई की रिपोर्ट के सामने खड़ी नहीं होती है। यह एस्टिमेट सीआरआरआई की सहमति के बाद तैयार किया गया है। पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने किसी कंसलटेंट को नियुक्त नहीं किया है। मामले में खास बात यह है कि इस एस्टिमेट को मंजूरी देने के लेकर गठित वर्क कमिटी में पीडब्ल्यूडी बीएंडआर के उच्चाधिकारी भी शामिल हैं। यदि हूडा के एस्टिमेट में किसी तरह की कमी थी तो उसे पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने मंजूरी क्यों प्रदान कर दी।

क्या कहते हैं चीफ इंजीनियर

चीफ इंजीनियर पंकज कुमरा का कहना है कि उन्हें इग्जेक्युटिव इंजीनियर की रिपोर्ट मिली है। इस मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से बातचीत की जा रही है। इससे पहले कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।



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