नई दिल्ली।। दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में बिल्डर्स और कुछ अमीर लोग रियल एस्टेट बिजनेस से मोटा माल बना रहे हैं, जबकि आम ग्राहकों को अपने घर के लिए ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है। माल बनाने का यह पूरा खेल बहुत साधारण है। इसमें हाउसिंग प्रॉजेक्ट के लॉन्च होने से पहले डिवेलपर्स भारी डिस्काउंट पर इनवेंटरी के एक हिस्से को चुनिंदा इन्वेस्टर्स को बेच देते हैं। इसमें परिवार के सदस्य, दोस्त और दूसरे हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स शामिल होते हैं। प्रॉजेक्ट्स पर दिया जाने वाला डिस्काउंट 15-25 % के बीच हो सकता है। जब इस प्रॉजेक्ट को अधिकारिक रूप से रेग्युलर होम बायर्स के लिए लॉन्च किया जाता है तो ये इनवेस्टर्स अपनी बुकिंग बेच देते हैं।
इसका सीधा बेनिफिट इन्वेस्टर्स और डिवेलपर्स को मिलता है। लेकिन आम ग्राहकों को ऊंची कीमतों का बोझ उठाना पड़ता है। उन्हें उसी अपार्टमेंट के लिए ज्यादा दाम देने पड़ते हैं। नैशनल रियल एस्टेट डिवेलपमेंट काउंसिल के प्रेजिडेंट नवीन रहेजा का कहना है, ‘शायद इसी कारण कमजोर मांग के बावजूद दिल्ली-एनसीआर मार्केट में कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।’
पिछले कुछ सालों में बैंकों ने सेक्टर को दी जाने वाली उधारी घटाई है, इससे डिवेलपर्स को नकदी का संकट झेलना पड़ा है। ऐसे में उत्तर भारत के डिवेलपर्स ने पैसा जुटाने के लिए इसी जुगत का सहारा लिया है।
नैशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव आते हैं और यहां प्री-लॉन्चेज ज्यादा होते हैं, क्योंकि ये इन्वेस्टर्स केंद्रित शहर हैं। इसकी तुलना में चेन्नै और बेंगलुरु एंड यूजर शहर हैं। नोएडा की प्रॉपर्टी ब्रोकरेज फर्म इन्वेस्टर्स क्लीनिक के चीफ एग्जेक्युटिव ऑफिसर हनी कात्याल का कहना है, ‘इन प्री लॉन्चेज में इन्वेस्टर्स को लॉन्च प्राइस के मुकाबले 10-15 फीसदी का डिस्काउंट मिल जाता है।’ इस तरह से बिल्डर तो पैसा बनाते ही हैं, निवेशकों को शुरुआत में लगाए गए पैसों पर 50-100 फीसदी का प्रॉफिट मिलता है।
हाल में एक मिड साइज डिवेलपर ने द्वारका-मानेसर एक्सप्रेस वे पर एक हाउसिंग प्रॉजेक्ट में अपनी 15 % इनवेंटरी को इन्वेस्टर्स के एक ग्रुप को 3,900 रुपए प्रति वर्ग फुट पर बेची। प्री लॉन्च के समय डिवेलपर जमीन खरीदने की प्रक्रिया में लगा हुआ था और उसे जमीन बेचने वाले को भुगतान करने के लिए पैसों की जरूरत थी। करीब पांच महीने के बाद औपचारिक रूप से प्रॉजेक्ट 4,900 रुपए प्रति वर्ग फुट के रेट पर लॉन्च किया गया। आमतौर पर ऐसी प्री लॉन्च की जानकारी लोगों को नहीं हो पाती है, क्योंकि यह कानूनी रूप से वैध नहीं है। गुड़गांव में टाउन ऐंड कंट्री प्लैनिंग डिपार्टमेंट से वैध लाइसेंस लेने से पहले प्रॉपटीज बेचना गैर कानूनी है। हाल में डिपार्टमेंट ने गुड़गांव के एक डिवेलपर के खिलाफ एफआरआई दर्ज कराई है। यह डिवेलपर बगैर वैध लाइसेंस के सेक्टर 78-79 में प्लॉट बेच रहा था।
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