दिल्ली सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट द्वारा जारी नए सर्कुलर के बाद प्रॉपर्टी मार्केट में सन्नाटा है। सर्कुलर में कहा गया है कि बिल, जीपीए और ऐग्रिमेंट टु सेल (सभी या कोई एक) के आधार पर प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट रजिस्टर्ड नहीं किए जाएंगे। इस सर्कुलर के आने से डीडीए जैसी एजेंसी द्वारा अलॉट प्रॉपर्टी की भी रजिस्ट्री बंद हो गई है। अब तक डीडीए या किसी अन्य एजेंसी की लीज होल्ड संपत्ति के संबंध में ऐग्रिमेंट टु सेल पर ड्यूटी देकर डॉक्युमेंट रजिस्टर्ड कराए जा रहे थे। वहीं, रेग्युलराइज्ड कॉलोनियों की प्रॉपर्टी के मामलों में जीपीए रजिस्ट्रेशन तो बंद ही था, लेकिन जीपीए होल्डरों द्वारा सेल डीड एग्जक्यूट किए जाने पर रजिस्ट्रेशन हो रहा था। लेकिन अब जीपीए के आधार पर सेल डीड तक पर रोक लगा दी गई है।
सिर्फ सेल डीड से सेल डीड
अब स्थिति ऐसी है कि सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में सिर्फ सेल डीड से सेल डीड रजिस्टर्ड किए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने अपने सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। 11 अक्टूबर, 2011 को आए उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी संपत्ति का हस्तांतरण सिर्फ रजिस्टर्ड कन्वेंस डीड (हस्तांतरण पत्र) के द्वारा ही हो सकता है। जीपीए सेल्स यानी जीपीए, एसपीए या वसीयत के द्वारा होने वाले ट्रांसफर से न ही मालिकाना हक मिलता है और न ही ये किसी अचल संपत्ति के ट्रांसफर के लिए मान्यता प्राप्त या वैध तरीका है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि अदालतों द्वारा इस तरह के सौदों में ट्रांसफर को पूरा नहीं माना जाएगा क्योंकि उससे न तो हस्तांतरण होता और न ही उस अचल संपत्ति में किसी प्रकार का हित पैदा होता है। इन दस्तावेजों को (ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट के सेक्शन 53ए के तहत सीमित सीमा को छोड़) टाइटल डीड नहीं माना जा सकता है और न ही इस तरह के ट्रांसजेक्शंस को म्यूनिसिपल या रेवेन्यू रेकॉर्ड में म्युटेशन का आधार बनाया जा सकता है।
1 मई को आया फरमान
सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया था, उसके बाद से डीडीए या किसी अन्य एजेंसी जिनके द्वारा लीज होल्ड प्रॉपर्टी अलॉट की गई थी या की जा रही है, को छोड़ जीपीए सेल बंद हो गया था। डीडीए या किसी अन्य एजेंसी से इतर प्रॉपर्टीज के जो ट्रांसजेक्शंस हो रहे थे, उनमें जीपीए होल्डरों द्वारा आगे सेल डीड किए जा रहे थे। लेकिन 1 मई 2012 से जीपीए होल्डरों द्वारा सेल डीड करने पर भी रोक लगा दी गई है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने जो सर्कुलर जारी किया है, उसमें सभी सब-रजिस्ट्रारों को यह निर्देश दिया गया है कि किसी भी अचल संपत्ति के संबंध में जीपीए, ऐग्रिमेंट टु सेल या वसीयत (सभी या कोई एक) के आधार पर कंवेंस एग्जक्यूट नहीं किए जा सकते। इसी पाइंट के आधार पर सभी सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में दो दिन से प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन करीब-करीब बंद हैं।
सर्कुलर पर विवाद
सर्कुलर को लेकर पब्लिक से लेकर वकील तक हैरान-परेशान हैं। लोगों का कहना है कि आखिर अचानक ऐसा कैसे किया जा सकता है। और, सुप्रीम कोर्ट का फैसला अक्टूबर में आया था, तब से अब तक किस कानून या नियम के तहत रजिस्ट्रेशन किया जा रहा था और अब क्यों नहीं किया जा सकता। रजिस्ट्रेशन ऐक्ट से जुड़े वकील दीपक कुमार सिंह का कहना है कि इससे न सिर्फ जनता को परेशानी हो रही है बल्कि सरकार को भी रेवेन्यू का काफी नुकसान हो रहा है। वहीं साकेत में प्रैक्टिस करने वाले ऐडवोकेट हरेराम सिंह ने कहा कि सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। जनकपुरी और कापसहेड़ा सब रजिस्ट्रार ऑफिस में डील करने वाले वकील अजिताभ का कहना है कि दिल्ली जैसे शहर में जहां दशकों से यादातर प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन अटर्नी और वसीयत के आधार पर ही होते रहे हैं, वहां अचानक इस तरह का फैसला लिया जाना गलत है। इस फैसले के कारण जो जीपीए होल्डर सेल डीड करना चाहते हैं, वे भी नहीं कर सकते।
रजिस्ट्रेशन में भारी कमी
रोहिणी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के सूत्रों के मुताबिक वहां रजिस्ट्रर्ड होने वाले दस्तावेजों की संख्या में करीब 60-70 फीसदी की गिरावट आई है। यहां पहले रोज औसतन करीब 100 दस्तावेज रजिस्टर्ड हो रहे थे। जनकपुरी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में भी स्थिति ऐसी ही है। यहां 1 मई से पहले रोज 200 से 250 दस्तावेज रजिस्टर्ड होते थे। लेकिन अब संख्या 100 से 150 के आसपास आ गई है। कापसहेड़ा, पीतमपुरा महरौली आदि अन्य सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों की भी हालत ऐसी ही है। हर जगह कामकाज प्रभावित है।
लटके चेहरे
प्रॉपर्टी कारोबारियों के चेहरे भी लटक गए हैं। लोगों के तमाम पुराने ट्रांजेक्शंस एटॉर्नी बेस्ड हैं। उत्तम नगर इलाके के प्रॉपर्टी कारोबारी पवन सिंघल ने कहा कि इस सर्कुलर का पूरी तरह नेगेटिव इंपैक्ट है। लोगों के लिए अब मुसीबत यह है कि वे अपने सौदों के निकाल भी नहीं सकते। एक अन्य प्रॉपर्टी कारोबारी सरकार को कुछ समय तो देना ही चाहिए था।
आदेश का पालन
लोगों को हो रही परेशानी को लेकर जब कई सब-रिजस्ट्रार ऑफिस के अफसरों जब इस संबंध में बात की गई, तो उनका यही कहना रहा कि वे ऊपर के आदेश का पालन कर रहे हैं। उनके हाथ में कुछ नहीं है। डिविजनल कमिश्नर से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई।
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