एनबीटी न्यूज ॥ गुड़गांव
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश से बिल्डर के साथ ही साथ लोग भी बेचैन हैं। हाई कोर्ट ने हरियाणा अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी को जारी आदेश में कहा है कि बिल्डिंग प्लान को तब तक मंजूरी न दी जाए, जब तक बिल्डर यह न बताए कि वह कंस्ट्रक्शन के लिए पानी कहां से लाएगा और निर्माण में ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल नहीं करेगा। अब इस प्रतिबंध से बिल्डर्स के नये प्रोजेक्ट लेट हो जाएंगे। इस मामले में 31 जुलाई को हूडा के चीफ ऐडमिनिस्ट्रेटर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के सेक्रेटरी, लोकल बॉडी के सेक्रेटरी अदालत के सामने समस्या के समाधान का प्रपोजल पेश करेंगे।
क्या थी याचिका
कुतुब रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने कंस्ट्रक्शन में ग्राउंड वॉटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन यहां इसका उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका के अनुसार, 11 जून, 2007 से 2 नवंबर, 2010 तक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने 264 बिल्डरों को रेजिडेंशल व कमर्शल कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस जारी किया था। यह प्रोजेक्ट 670 मिलियन स्क्वायर फीट एरिया में है। कंस्ट्रक्शन नियमों के अनुसार, हर स्क्वायर फीट में प्रतिदिन 100 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यह सारे प्रोजेक्ट ग्राउंडवॉटर से चल रहे हैं। इसके अनुसार, 37 एमजीडी (मिलियन गेलन पर डे) भूजल का दोहन हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि 120 बिल्डर्स ने इसका उल्लंघन किया है, जिसका मामला फरीदाबाद स्थित एनवायरनमेंट कोर्ट में चल रहा है। स्टेट लेवल एनवायरनमेंट एक्सपर्ट असिस्मेंट कमिटी उल्लंघन पर लाइसेंस को कैंसल कर सकती है, लेकिन ग्राउंडवॉटर का दुरुपयोग जमकर किया जा रहा है।
याचिका के अनुसार गुड़गांव में 25 लाख की आबादी है। 150 लीटर पर डे के हिसाब से 148 एमजीडी पानी की आवश्यकता है। गुड़गांव में करीब 5 लाख मजदूर भी रह रहे हैं, जिन्हें 15 एमजीडी पानी की आवश्यकता है। इस तरह यहां 200 एमजीडी पानी का इस्तेमाल हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2009 में सिटी मैजिस्ट्रेट यशेंद्र सिंह ने एक केस में हाई कोर्ट में शपथ पत्र दिया था, जिसमें कहा गया था कि 60 एमजीडी पानी की सप्लाई बसई स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से की जा रही है। इस तरह रोजाना 140 एमजीडी पानी का भूजल से दोहन किया जा रहा है। इसमंे कहा गया है कि ग्राउंडवॉटर लेवल लगातार नीचे जा रहा है, जिससे भविष्य में भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
हाई कोर्ट का आदेश
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ( एक्टिंग ) जसबीर सिंह व जज राकेश कुमार जैन की बेंच ने आदेश जारी किए हैं कि हूडा को अभी तक यह मालूम नहीं है कि गुड़गांव में पीने के पानी की कितनी आवश्यकता है और कंस्ट्रक्शन के लिए कितना पानी चाहिए। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी तरफ से कितने घरों को वॉटर सप्लाई के कनेक्शन जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि 31 जुलाई को हूडा के चीफ ऐडमिनिस्ट्रेटर , टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के सेक्रेटरी , लोकल बॉडी के सेक्रेटरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत होकर पानी की समस्या के समाधान का प्रपोजल प्रस्तुत करें। यह स्पष्ट करें कि भूजल दोहन को पूर्णतया बंद कर दिया गया है। कंस्ट्रक्शन व पीने के लिए कितने पानी की आवश्यकता है। कितने कनेक्शन दिए गए हैं। तब तक नए बिल्डिंग प्लान के सेक्शन पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इन प्लान को तब तक मंजूरी प्रदान नहीं की जाए , जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता है कि कंस्ट्रक्शन में ग्राउंडवॉटर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। यह भी बताया जाए कि कंस्ट्रक्शन को लेकर पानी कहां से लिया जा रह ा है।
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